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धार्मिक स्थल ऐसा जहां मंत्र और कुरान पढ़ा जाता साथ में, और थाली भी होती है एक ही

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यह दुनिया बहुत ही अजीबोगरीब चीजों से भरी हुई है। कभी आपको अजीब इंसान दिखाई देंगे, तो कभी अजीब स्थान दिखाई देंगे। बात की जाए भारत की तो यहां पर चमत्कार आए दिन होते ही रहते हैं। कई ऐसे जगह आपको यहां पर देखने को मिलेंगे। जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। तो ऐसे ही एक चमत्कार के बारे में आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं। आपने देखा होगा कि मंदिर में लोग प्रार्थना करते हैं। और दरगाह में लोग इबादत करते हैं। यह दोनों अलग-अलग जगह पर होती है। परंतु आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर मंदिर और मस्जिद दोनों एक ही जगह में एक ही कमरे में है और बिना किसी लड़ाई के यहां पर प्रार्थना और इबादत दोनों होती है।

बीच में बस एक छोटी सी दीवार

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हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के घोड़ाधरा गांव की। यहां पर एक कमरे में दरगाह और एक कमरे में शिव मंदिर यानी की एक दीवार के इधर दरगाह और एक दीवार के उधर शिव मंदिर है। जो आपको देखने को मिलेगा और 23 साल से यह ऐसे का ऐसे ही है और लोगों के लिए मिसाल बना हुआ है।

एक साथ पढ़े जाते हैं मंत्र और कुरान

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इस जगह पर शाम को जहां भजन होते हैं उसी लाउडस्पीकर में कव्वाली भी होती है और केसरिया और हरे ध्वज दोनों ही यहां पर लहराते हुए आपको मिलेंगे।

1986 में बना था मंदिर

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कहानी कुछ इस तरह है कि इन दोनों परिसरों के केयरटेकर नारायण आचार्य ने पहले अपने घर में एक मंदिर बनवाया था। परंतु बाद में वह मुस्लिम पीर सईद गुलाम चिश्ती के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हुए, उनके खत्म होने के बाद उनको शिवलिंग के पास ही दफना दिया। तब से लेकर अब तक किसी ने भी इस बात का कोई विरोध नहीं किया है।

कुरान के साथ ही गीता भी जानते थे चिश्ती साहब

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आचार्य जी जहां पर गीता वेद सुना करते थे, वहीं वह अरबी में कुरान की आयतें भी सुनना पसंद करते थे। वह यह जानते थे कि गीता और कुरान में संदेश एक ही है दोनों ही हमें प्यार और साथ में रहना सिखाते हैं।

आचार्य जी को इस बात की चिंता

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आचार्य जी यह सोचते हैं कि जब तक मैं जिंदा हूं तब तक शायद यहां पर एकता और शांति है। परंतु अगर किसी दिन मेरी मौत हो गई तो मेरे मरने के बाद इस जगह का क्या होगा।

अलवर में भी ऐसा एक धर्म स्थल

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अब हम बात कर रहे हैं अलवर के मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित एक धार्मिक स्थल की। जहां पर सय्यद दरबार भी है और साथ में संकट मोचन हनुमान मंदिर भी है।

क्या दिक्कत है?

यहां के महंत को एक चीज से बहुत आपत्ति है और वह है कि जो लोग यहां पर आते हैं तो वह बहूत आश्चर्यजनक हो जातेे हैं कि एक ही छत के नीचे दो धार्मिक स्थल कैसे हो सकते हैं। वह भी धार्मिक स्थल हिंदू और मुस्लिम की। जो कि एक दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाते हैं। परंतु उनके अनुसार इन दोनों जगह पर जाने का रास्ता एक ही है जो की पूरी तरह से पवित्र है।

पूजा की थाली भी होती है एक

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आप विश्वास नहीं करेंगे यहां पर जिस पूजा की थाली से संकटमोचन हनुमान की आरती होती है वही पूजा की थाली दरगाह में भी इस्तेमाल की जाती है। पहले लोग उस थाली से टीका लगाते हैं फिर बाद में सर पर कपड़ा रख कर इबादत करते हैं।

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