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CA और MBA करने के बावजूद फूलो की खेती करने वाली दो लड़कियों की कहानी।

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सिर्फ बड़ी डिग्री हासिल करने से ही सफलता नही मिल सकती बल्कि सफलता तो किसी भी क्षेत्र में ज़रूरत को मद्देनज़र रखते हुए उसी क्षेत्र में कुछ नया कर दिखाने पर मिलती है। आज हम आपको ऐसी ही दो लड़कियों की कहानी बताने वाले है जिन्होंने CA और MBA करने के बाद भी किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने के बजाए खेती करने का रास्ता चुना और सबको दिखा दिया कि पढ़ लिखकर भी खेती के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल किया जाता है।

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जयपुर और दिल्ली की है शिवानी माहेश्वरी और वामिका बेहती :-

यह कहानी दो सहेलियों की है जिनका नाम शिवानी माहेश्वरी और वामिका बेहती जिन्होंने अपनी नौकरी के बजाए हरियाणा में फूलों की खेती का व्यवसाय करना ज़्यादा पसंद किया । और लोगो के लिए मिसाल कायम की।

इंटरनेट पर सर्च कर पता लगाया इस कारोबार के बारे में :-

शिवानी MBA ग्रैजुएट हैं तो वही वामिका CA हैं। लेकिन उनके फूलो की खेती की तरफ रुचि बढ़ने की कहानी साल 2015 में शुरू हुई तब शिवानी को दिल्ली में एक पॉलीहाउस फार्मिंग नेट देखने का मौका मिला । तब शिवानी ने वहाँ की कुछ तस्वीरें कैमरे में क़ैद की और फूलों के व्यवसाय के बारे में इंटरनेट पर रिसर्च की। वहाँ उनकी मुलाकात वामिका से हुई और फिर दोनों ने साथ मे यह निर्णय लिया कि वह इस व्यवसाय को जल्द ही शुरू करेंगे।

फ्लोरिकल्चर इंडस्ट्री में बढ़ रही ग्रोथ को देख किया उसकी तरफ रुख :-

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हरियाणा में ज़्यादातर लोग खेती पर ही निर्भर है और इंडिया में फ्लोरिकल्चर इंडस्ट्री में करीब 30% सालाना तेज़ी को भाप कर वामिका और शिवानी ने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की सोची आपको बता दे कि यह इंडस्ट्री अकेले इंडिया में 10,000 करोड़ रूपए से भी ज़्यादा की है ऐसे में इस क्षेत्र में अभी भी सफलता के आसार इसकी ग्रोथ के साथ बढ़ते ही जा रहे है।

शुरू किया यूनिस्टार एग्रो नाम का फार्म :-

जब उन्होंने यह तय कर लिया कि इस क्षेत्र में उन्हें कुछ करना ही है तब वामिका को अपनी बहादुरगढ़ में एक फैक्ट्री और झझर जिले के तंडाहेरी गांव में खाली जमीन काम आई जिस पर दोनों ने मिलकर यूनिस्टार एग्रो नाम की एक फार्म शुरू कर दी आपको बताते हुए चले कि इस फार्म में  लिलियम, गेरबेरा, गुलाब, रजनीगंधा और ग्लेडियोलस की खेती से शुरुआत हुई और दोनों सहेलियों ने अपने फूलों के व्यवसाय में अपनी CA और MBA की डिग्री का भी पूरा प्रयोग किया जिसका फायदा इन्हें अपने व्यवसाय में अभी भी मिल रहा है।

विदेशो में फैलाना चाहती है कारोबार :-

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एक आईडिया से शुरू हुए यूनिस्टार एग्रो को अब हरियाणा सरकार भी सहायता प्रदान कर रही है,दोनों सहेलिया अपनी डिग्री की वजह से मिली  तकनीकी जानकारी की वजह से ऑर्गेनिक खेती करने के लिये कई किसानों को सहायता कर रही है फूलों का व्यवसाय फूलो की ही तरह खूब फल-फूल रहा है। अब सरकार उन्हें पुरस्कार सब्सिडी और इनसेनटिव भी देती है। मगर शिवानी और वामिका अपना फार्म सिर्फ भारत तक सीमित नही रखना चाहती बल्कि वह अब अपने फूलो की खुशबू से विदेशो की धरती भी महकाना चाहती है।

आपको शिवानी और वामिका कि यह कहानी जो केन्फोलिओस से ली गई है अगर अच्छी लगी तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे।

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