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    जानिए किन सेलिब्रिटी ने अपने पूरे शरीर को दान कर दिया है

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    दुनिया में आपका ऐसे बहुत से लोग मिलेंगे। जो अपने शरीर के अंगों को दान करते हैं। परंतु आज हम आपको ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं वह भी सेलेब्रिटीज के बारे में, जिन्होंने अपने शरीर के अंग के अलावा अपने पूरे शरीर ही दान कर दिया है। और कुछ सेलिब्रिटी ऐसे भी है जिन्होंने शरीर के कुछ अंग को दान करने का फैसला किया है। आइए जानते हैं इन सेलेब्रिटीज के लिस्ट में किसका किसका नाम है।

    ऐश्वर्या राय

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    जब ऐश्वर्या राय की बात आती है तो उनकी आंखें सबसे पहले सामने आती है। इनकी खूबसूरत आंखों की तो हर कोई दीवाना है। इसलिए अपनी इन खूबसूरत आंखों को दान करने का फैसला ऐश्वर्या ने लिया है।

    सोनाक्षी सिन्हा

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    दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा को तो सब कोई जानता है और वह यंग लोगों के दिल की धड़कन भी है। ऐसे में उन्होंने अपनी आंखें दान करने का फैसला किया है।

    आमिर खान

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    आमिर खान भी इस बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर चेहरों में से एक है और वह आए दिन सामाजिक सेवा करते रहते हैं। उन्होंने अपने शरीर को दान करने का फैसला किया है।

    प्रियंका चोपड़ा

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    प्रियंका चोपड़ा अपने पिता शिव चोपड़ा से बहुत प्यार करती थी जब वह बीमार थी। उस समय उनका समय बहुत ही कठिनाई से गुजर रहा था। उनकी मृत्यु के बाद प्रियंका चोपड़ा ने फैसला किया कि मैं अपना पूरा शरीर दान कर दूंगी

    सलमान खान

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    सलमान खान तो समाज सेवा करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं। उनके जितने भी कमाई होती है उसका आधा हिस्सा वह NGO में दान कर देते हैं। इसके अलावा उन्होंने बोन मैरो दान करने का फैसला किया है। इससे कैंसर पीड़ित लोगों को जीवनदान मिलेगा।

     

    रानी मुखर्जी

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    रानी मुखर्जी हर समाज सेवा में भाग लेने का मौका नहीं छोड़ते हैं और हर गतिविधियों में भाग बढ़-चढ़ कर लेती हैं। ऐसे में उन्होंने अपनी आंखें डोनेट करके लोगों को खूबसूरत दुनिया देखने का मौका दिया है।

    फराह खान

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    फरहा खान को कौन नहीं जानता। जितना लोग बॉलीवुड के अभिनेता अभिनेत्रियों को जानते हैं। उतना ही कोरियोग्राफर फराह खान को भी जानते हैं। उन्होंने भी अपने शरीर के सभी अंग को डोनेट करने का मन बना लिया है।

    जूही चावला

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    एक दिन जूही चावला अपने किसी रिश्तेदार से मिलने उनके घर जा रही थी। रास्ते में अचानक उन्होंने एक एनजीओ के सामने भीड़ देखी। वहां पर लिखा था कृपया अपना नेत्रदान करें। तब से जूही चावला ने भी अपने नेत्रदान का मन बना लिया है।

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    धार्मिक स्थल ऐसा जहां मंत्र और कुरान पढ़ा जाता साथ में, और थाली भी होती है एक ही

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    यह दुनिया बहुत ही अजीबोगरीब चीजों से भरी हुई है। कभी आपको अजीब इंसान दिखाई देंगे, तो कभी अजीब स्थान दिखाई देंगे। बात की जाए भारत की तो यहां पर चमत्कार आए दिन होते ही रहते हैं। कई ऐसे जगह आपको यहां पर देखने को मिलेंगे। जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। तो ऐसे ही एक चमत्कार के बारे में आज हम आपसे बात करने जा रहे हैं। आपने देखा होगा कि मंदिर में लोग प्रार्थना करते हैं। और दरगाह में लोग इबादत करते हैं। यह दोनों अलग-अलग जगह पर होती है। परंतु आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर मंदिर और मस्जिद दोनों एक ही जगह में एक ही कमरे में है और बिना किसी लड़ाई के यहां पर प्रार्थना और इबादत दोनों होती है।

    बीच में बस एक छोटी सी दीवार

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    हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले के घोड़ाधरा गांव की। यहां पर एक कमरे में दरगाह और एक कमरे में शिव मंदिर यानी की एक दीवार के इधर दरगाह और एक दीवार के उधर शिव मंदिर है। जो आपको देखने को मिलेगा और 23 साल से यह ऐसे का ऐसे ही है और लोगों के लिए मिसाल बना हुआ है।

    एक साथ पढ़े जाते हैं मंत्र और कुरान

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    इस जगह पर शाम को जहां भजन होते हैं उसी लाउडस्पीकर में कव्वाली भी होती है और केसरिया और हरे ध्वज दोनों ही यहां पर लहराते हुए आपको मिलेंगे।

    1986 में बना था मंदिर

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    कहानी कुछ इस तरह है कि इन दोनों परिसरों के केयरटेकर नारायण आचार्य ने पहले अपने घर में एक मंदिर बनवाया था। परंतु बाद में वह मुस्लिम पीर सईद गुलाम चिश्ती के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हुए, उनके खत्म होने के बाद उनको शिवलिंग के पास ही दफना दिया। तब से लेकर अब तक किसी ने भी इस बात का कोई विरोध नहीं किया है।

    कुरान के साथ ही गीता भी जानते थे चिश्ती साहब

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    आचार्य जी जहां पर गीता वेद सुना करते थे, वहीं वह अरबी में कुरान की आयतें भी सुनना पसंद करते थे। वह यह जानते थे कि गीता और कुरान में संदेश एक ही है दोनों ही हमें प्यार और साथ में रहना सिखाते हैं।

    आचार्य जी को इस बात की चिंता

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    आचार्य जी यह सोचते हैं कि जब तक मैं जिंदा हूं तब तक शायद यहां पर एकता और शांति है। परंतु अगर किसी दिन मेरी मौत हो गई तो मेरे मरने के बाद इस जगह का क्या होगा।

    अलवर में भी ऐसा एक धर्म स्थल

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    अब हम बात कर रहे हैं अलवर के मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित एक धार्मिक स्थल की। जहां पर सय्यद दरबार भी है और साथ में संकट मोचन हनुमान मंदिर भी है।

    क्या दिक्कत है?

    यहां के महंत को एक चीज से बहुत आपत्ति है और वह है कि जो लोग यहां पर आते हैं तो वह बहूत आश्चर्यजनक हो जातेे हैं कि एक ही छत के नीचे दो धार्मिक स्थल कैसे हो सकते हैं। वह भी धार्मिक स्थल हिंदू और मुस्लिम की। जो कि एक दूसरे के कट्टर दुश्मन माने जाते हैं। परंतु उनके अनुसार इन दोनों जगह पर जाने का रास्ता एक ही है जो की पूरी तरह से पवित्र है।

    पूजा की थाली भी होती है एक

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    आप विश्वास नहीं करेंगे यहां पर जिस पूजा की थाली से संकटमोचन हनुमान की आरती होती है वही पूजा की थाली दरगाह में भी इस्तेमाल की जाती है। पहले लोग उस थाली से टीका लगाते हैं फिर बाद में सर पर कपड़ा रख कर इबादत करते हैं।

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    करोड़ो की कमाई करने वाले सितारो की पहली कमाई। एक मजदूर से भी कम थी आप खुद ही देख लो किसकी कमाई कितनी

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    हर व्यक्ति के जिंदगी में ऐसे लम्हे जरूर आते हैं। जिसमें वह उस पल को पहली बार जीता है। जैसे कि पहली बार स्कूल जाना, पहली बार शादी करना, पहली बार मां-बाप का सुख, पहली बार नौकरी करना आदि। इस तरह के बहुत सारे लम्हे होते हैं जो इंसान पहली बार जीता है। आज हम आपको उसी लम्हों के बारे में बताएंगे। हम बात कर रहे हैं सुपरस्टार के उन लम्हों की जब उनके पास पहली बार काम आया था और उस समय उनकी कमाई स्पॉट बॉय से भी बहुत कम थी।

    अमिताभ बच्चन

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    आज अमिताभ बच्चन अरबों रुपए के संपत्ति के मालिक माने जाते हैं। परंतु एक समय ऐसा भी था जब अमिताभ बच्चन कोलकाता की एक शिपिंग फर्म में काम करते थे तब उनकी तनख्वाह मात्र ₹500 महीना थी।

    शाहरुख़ खान

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    आज बॉलीवुड के किंग खान के पास सब कुछ है। वो जो चाहे खरीद सकते हैं परंतु एक समय ऐसा था जब वह पंकज उदास की गजल कॉन्सर्ट में अटेंडेंट का काम संभालते थे और उनको जो पहली तनख्वाह मिली थी वह थी 50 रुपए

    प्रियंका चोपड़ा

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    इंटरनेशनल हीरोइन बन चुकी प्रियंका चोपड़ा ने जो सबसे पहले कमाई की थी वह थी ₹5000 और वह कमाई उन्होंने अपनी मां को दे दी थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज तक उसकी मां ने वह ₹5000 खर्च नहीं किए।

    सलमान खान

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    बॉलीवुड के दबंग खान को कौन नहीं जानता। करोड़ों का कारोबार है उनका। परंतु उनकी पहली कमाई मात्र ₹70 थी

    अक्षय कुमार

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    खिलाड़ी के रूप में जाने वाले अक्षय कुमार पहले एक रेस्टोरेंट में शेफ का काम करते थे। उन्हें उस काम के लिए ₹15000 हर महीने मिलते थे।

    ऋतिक रोशन

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    रितिक रोशन ने बाल कलाकार के रूप में भी फिल्म में काम किया था। 1980 में एक फ़िल्म में उन्होंने छोटा सा रोल किया था जिसके लिए उन्हें सौ रुपए मिले थे।

    इरफान खान

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    बॉलीवुड के टैलेंटेड स्टार में से माने जाने वाले इरफान खान एक बच्चे को ट्यूशन पढ़ाते थे। जिसकी फीस उन्हें मात्र 25 रूपय मिली थी।

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    अनुष्का ने ऊप्स मोमेंट को ऊप्स मोमेंट ही नहीं रहने दिया

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    हम जब बॉलीवुड फिल्में देखते हैं तो हमें लगता है कि एक्टिंग करना बहुत ही आसान है। बॉलीवुड में बहुत पैसा है। यहां पर जो लोग आते हैं उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। उनकी जिंदगी आराम की होती है। परंतु हमारी यह सोच बिल्कुल ही गलत है। अगर हम बात करें बीटाउन की बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों की तो उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उसके बाद ही वह एक सक्सेसफुल अभिनेत्री बन पाती हैं। उन्हें इतनी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है जिसका हमें अंदाजा भी नहीं है। पैसा कमाना इतना आसान नहीं है। उसके लिए बहुत सारी मेहनत करनी पड़ती है।

    अपने आप को सुंदर और आकर्षित दिखाने के लिए अभिनेत्रियां बहुत सारी जगह पर ऐसी ड्रेस पहन कर जाते हैं, ताकि वहां के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने और लोगों की मनपसंद अभिनेत्री बन जाए। उन्हें बहुत सारी जगह पर जाना पड़ता है। जैसे कि किसी पार्टी, किसी अवॉर्ड शो में, फ़िल्म की प्रमोशन के लिए, किसी सीरियल में। ऐसी बहुत सी जगह पर उन्हें जाना होता है। जहां पर उनकी ड्रेस बहुत अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में कई बार वो ऊप्स मोमेंट का शिकार हो जाती है। बस इसी तरह की एक बात लेकर हम आपके पास आए हैं। आज हम बात कर रहे हैं अनुष्का शर्मा की। जिनको ऊप्स मोमेंट का शिकार होना पड़ा। परंतु उन्होंने अपने ऊप्स मोमेंट को कैसे संभाला, किस बोल्ड तरीके से सुधारा इसके बारे में भी जानेंगे।

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    अनुष्का शर्मा ने अपने डेब्यू फिल्म 2008 में रब ने बना दी जोड़ी में अभिनेता सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ की। उसके बाद तो उनकी जिंदगी में फिल्मों की लाइन लग गयी और उन्होंने धमाल मचाया।

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    उसके बाद उन्होंने कई सक्सेस फ़िल्म मिली। जैसे की PK, सुल्तान, बैंड बाजा बारात।इस तरह की सक्सेसफुल फिल्में करके उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह एक अच्छी अभिनेत्री हैं और लोगों के दिलों में राज करने लगी है।

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    कुछ दिन पहले सचिन की फिल्म का प्रीमियर था। उसने अनुष्का अपने पार्टनर विराट के साथ पहुंचे। वहां पर उनकी ड्रेस मिसफिट लग रही थी जिसने मीडिया को अपनी तरफ खींच लिया।और वो वहां पर ऊप्स मोमेंट का शिकार हो गई। कई बार ना चाहते हुए भी अभिनेत्रियों की पर्सनल लाइफ भी मीडिया के सामने आ जाती है।

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    जैसे वो खुद एक अच्छी अभिनेत्री है वैसे उनका फैशन सेंस भी कमाल का है। उन्होंने अब तक तीन खानों के साथ काम किया है जो की छोटी बात नहीं है।

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    इसके बाद वह दोबारा ऊप्स मोमेंट का शिकार हुई। मकाउ में आईफा अवार्ड में अनुष्का को पता चला कि उनकी फेवरेट एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित लाइफ परफॉर्मेंस स्टेज पर करने वाली है। वह अपनी फेवरेट एक्ट्रेस को लाइव परफॉर्मेंस करते हुए देखना चाहती थी। इस जल्दबाजी में उनका गाउन फट गया। जिसकी वजह से उन्हें दोबारा ऊप्स मोमेंट का शिकार होना पड़ा।

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    उसके बाद कॉफी विद करण शो में अनुष्का गेस्ट के तौर पर गई थी। वहां पर उनके होठों को लेकर बहुत मजाक बनाया गया।उन्होंने इसके बारे में खुलासा करते हुए कहा, कि मेरे होंठ आपको इसलिए ऐसे नजर आ रहे हैं क्योंकि यह मेकअप का कमाल है।

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    ऐसे बहुत सारे ऊप्स मोमेंट अनुष्का की जिंदगी में आए। पर उन्होंने उन सब का बहुत आसानी से और सहजता के साथ सामना किया और इतना विवाद नहीं बनने दिया। इसीलिए लाइम लाइट में आने के लिए लोगों को बहुत संघर्ष करना पड़ता है और बहुत सारी चीजों का सामना करते हुए भी जिंदगी में आगे बढ़ना होता है। इस तरह हमारी बॉलीवुड की अभिनेत्रियां भी करती आ रही है।

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    एक ऐसा गांव जहाँ के ज्यादातर किसान हैं करोड़पति, युवाओ ने कुछ ऐसे बदली गांव की तस्वीर

    हमारे महापुरुष महात्मा गांधी ने एक बात कही थी, कि भारत की आत्मा गांव है। अगर किसी देश की तरक्की सही मायने में आप करवाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको गांव का विकास करना चाहिए। भारत में लगभग 700000 से भी ज्यादा गांव बसते हैं। और इनमें से ज्यादातर गांव ऐसे हैं जिन्होंने बिना किसी के सहारे खुद अपने बलबूते पर विकास किया है जो अब चर्चा का विषय बन गए हैं।

    बस इसी तरह आज एक गांव की कहानी आपको बताने जा रहे हैं, जिसमें अपने बलबूते पर अपने गांव का विकास किया है। यहां के लोग तकनीक और जैव आधारिक कृषि का इस्तेमाल बड़े ही अनोखे ढंग से करते हैं। हम बात कर रहे हैं, महाराष्ट्र के ही भरे बाजार के आदर्श गांव की। जहां पर आपको हर एक किसान करोड़पति दिखाई देगा। इस गांव के लगभग 80 किसान करोडपति है।

    कहानी कुछ ऐसी है कि एक समय ऐसा था कि  ज्यादातर इस गाँव के लोग भूख से पीड़ित और गरीबी में अपनी जिंदगी गुजार रहे थे। जैसा की हर एक गांव में होता है वहां के मुखिया बुजुर्ग इंसान होते हैं। इस गांव की भी डोर बुजुर्ग इंसानों के हाथ में थी। जब यहां के युवा लोगों ने देखा कि इससे उनकी हालत बुरी होती जा रही है तो वह शहर गए। वहां अच्छी शिक्षा प्राप्त की। वहां से आने के बाद उन्होंने अपने खुद की जमीन पर आधुनिक तरीके से खेती की और 1 साल के बाद उसका नतीजा सामने आया। इसके बाद सब लोगों को उनसे प्रेरणा मिली।

    सबसे हैरान करने वाली बात तो ये  है की इस गांव में करीबन 305 परिवार रहते हैं। जिसमें से 80 से भी ज्यादा किसान करोड़पति आपको दिखाई देंगे, और इन करोड़पति के पीछे किसी उद्योगपति या बिजनेसमेन का हाथ नहीं है, बल्कि उन्होंने खुद अपनी मेहनत से और तकनीकी खेती से यह मुकाम हासिल किया है। इसके अलावा इस गांव में आपको रोजाना जिंदगी में इस्तमाल होने वाले सभी आधुनिक तकनीक देखने को मिलेंगे। यह लोग उर्जा तकनीक से 24 घंटे बिजली का इस्तमाल करते हैं।

    शहर गयी युवा पीढ़ी की तरक्की देखकर सबके दिमाग बदले। लोगों की सोच में परिवर्तन भी आया। लोगों ने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला किया। उसके बाद लोगों के बीच में इतनी जागरूकता आ गयी कि उन्होंने अपने गांव को तरक्की की रस्ते पे ले आए, और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां के लोग तंबाकू और शराब जैसी नशीली चीजों को हाथ भी नहीं लगाया हैं, तो यह वजह है इस गांव की तरक्की करने में। हम लोगों को भी इनसे कुछ सीखना चाहिए और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।

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    अपने बच्चों की मौत के बाद भी माता पिता ने किया कुछ ऐसा की प्रशंसा के हैं वह हकदार

    अपने बच्चों की मौत के बाद भी माता पिता ने किया कुछ ऐसा की प्रशंसा के हैं वह हकदार

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    आजकल किस समय किसको क्या हो जाए इसका बिल्कुल भी पता नहीं है। इसलिए कहा जाता है कि हर पल की खुशी से जीना चाहिए। क्योंकि किसकी मौत कब होजाए इज़के का एहसास किसी को भी नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं है कि सबसे पहले मौत बुजुर्ग इंसान की हो। आजकल जवान लोग बुजुर्गों से जादा मर रहे हैं। कोई भी माता पिता नहीं चाहते होंगे कि उनके बच्चों की मौत उनसे पहले हो जाए और अगर ऐसा होता है तो वह माता-पिता के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट जाता है उन्हें कभी कुछ समझ नहीं आता कि वो आगे भविष्य में क्या करेंगे और बिना अपने बच्चों के सहारे कैसे जियँगे। कुछ लोग तो इसी टेंशन में आकर सुसाइड कर लेते हैं, कुछ लोग इस बीमारी की वजह से मर जाते हैं। किसी के बच्चे की मौत हो जाने के बाद उसके माता-पिता का हौसला टूट जाता है। लेकिन आज हम जिस माता पिता के बारे में आपको बताने वाले हैं उनकी बारे में पढ़ने के बाद आपके साथ उनके हौसले और जज्बे को सलाम करेंगे।

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    7 युवा बच्चे अपनी पढ़ाई की परीक्षा देने जा रहे थे। तभी अचानक से उनकी कार फ्लाईओवर से टकरा गई और उनकी गाड़ी ऊपर से नीचे रेलवे ट्रैक के पास जाकर गिर गई। उसमें से दो बच्चों के नाम के संचित छावड़ा जिसकी उम्र 19 साल की थी दूसरी का नाम रितु सिंह जिनकी उम्र 18 साल की थी उनके साथ 4 और बच्चे थे जो सब कार ऑक्सीडेंट में मारे गए।

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    जब इसकी खबर उनके माता-पिता को पहुंची तो जैसे उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वह सदमे में चले गए। इस तरह से रिएक्शन देना सही है क्योंकि किसी भी इंसान के साथ अगर ऐसा होगा तो उसकी प्रतिक्रिया ऐसी ही रहेगी। एक युवा बच्चे को खो देना किसी भी माता-पिता के लिए सबसे बड़ा दुख है। परंतु अपने बच्चों को खो देने के बाद भी संचित, रितु के माता पिता ने ऐसा काम करके दिखाया जिसके बाद वह सलाम करने के हकदार है। संचित के पिता का नाम राजकुमार छाबड़ा है उन्होंने कहा कि मेरा बेटा तो इस दुनिया में नहीं रहा, इसका मुझे बेहद दुख है अब यह दुख कभी कम नहीं हो सकता है। परंतु मैं चाहता हूं कि मैं उसकी आंखें दान करूँ। ताकि उसकी इन आंखों से कोई दूसरा इंसान इस खूबसूरत दुनिया को देख सके। मुझे यह सोच कर ही शांति मिल जाएगी की मेरा बेटा तो नही रहा परंतु उसकी आंखे इस दुनिया में है।

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    यही सोच रितु के पिता ने भी दिखाई। इसके पिता का नाम मलखान सिंह है। उन्होंने भी अपनी बेटी की आंखें दान कर दी। आंखों में आंसू जरूर थे परंतु इस बात की शांति भी थी कि मेरी बेटी दुनिया में नहीं रही परंतु उसकी आंखें इस खूबसूरत दुनिया को देख रही है। मेरी बेटी आंखों की वजह से इस दुनिया में जिंदा रहेगी। यह आंखें जिसको भी मिलेगी मैं उसको मिलने हमेशा जाता रहूंगा। मुझे इससे ही तसल्ली मिल जाएगी की इन आंखों से वो अपने पिता को देख रही है।

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    आपको ये बात सुनकर और हैरानी होगी कि संजीव के पिताजी उसकी सिर्फ आंखें ही नहीं बल्कि उसका पूरा अंग दान करना चाहते थे। परंतु जब तक ngo वाले वहां पर आए तब तक उनके शरीर के सभी अंगो ने काम करना बंद कर दिया था। फिर आंखें ही काम कर रही थी। जिसके लिए संचित पिता ने तुरंत हां कर दी और बिना कुछ सोचे समझे उसकी आंखें दान करने का वादा कर दिया।

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    शायद आप सब इस बात से जानकर होंगे कि भारत में हिंदू धर्म के लोग इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं है कि किसी भी मृत इंसान के शरीर के अंगो का दान कर दिया जाए। क्योंकि उन लोगों का ऐसा मानना है कि मृत के अंगो का दान कर देने के बाद उस इंसान के शरीर को शांति नहीं मिलती है। इसी बात पर संचित और ऋतु के पिता ने कहा, कि इन अफवाहों की वजह से ही लोग सहायता के लिए आगे नहीं आते हैं। जिनको अंगो की जरूरत होती है उन्हें अंग नहीं मिल पाते हैं। क्योंकि लोगों के यह अफवाहें किसी के काम नहीं आती है। इस वजह से उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि इन अफवाहों पर विश्वास न करें और लोगों की मदद करने के लिए आगे आए। अपने अंगों को दान करें। अपनी आंखों को दान करें। ताकि आप के अंगो से और आंखों से ऐसा इंसान इस ख़ूबसूरत दुनिया को देख सकता है।

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    8वीं फेल होने के बाद अपने शौक को बनाया कॅरिअर, आज सीबीआई से लेकर रिलायंस चलती है इनके इशारे पर

    कुछ बड़ा और अनोखा करने के लिए बड़ी डिग्री की ही जरुरत नहीं होती,यह बात 8वी फ़ैल त्रिशनित ने साबित कर दी है। कम्प्यूटर में गहरी दिलचस्पी होने की वजह से त्रिशनित पढ़ाई के दौरान एग्जाम में फेल भी हुए, फिर उन्होंने अपने शौक को ही अपनी सफलता में बदल दिया पढ़िए त्रिशनित अरोड़ा की दिलचस्प कहानी।

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    त्रिशनित अरोड़ा एक एथिकल हैकर हैं। इनका जन्म 2 नवंबर सन 1993 मे हुआ था लुधियाना के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पले-बढ़े त्रिशनित को बचपन से ही पढ़ाई में कम और कंप्यूटर में ज्यादा दिलचस्पी थी। पूरे दिन कंप्यूटर में
    हैकिंग सीखने की वजह से त्रिशनित की बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं हो पाती और वह 8वीं में फेल हो गये थे ।

    12वीं तक कॉरेस्पॉन्डेंस से की पढ़ाई

    फ़ैल होने के बाद लेकिन त्रिशनित के घर वालो ने खूब नाराज़गी जताई लेकिन त्रिशनित ने हार नहीं मानी और कंप्यूटर में अपनी रूचि को बरकरार रखते हुए रेग्युलर पढ़ाई छोड़कर 12वीं तक कॉरेस्पॉन्डेंस से पढ़ाई करने का फैसला किया।

    पेरेंट्स को उनका काम पसंद नहीं था

    त्रिशनित की हाउस वाइफ मां और अकाउंटेंट पिता उनकी कंप्यूटर के प्रति रूचि और उनके इस काम को पसंद नहीं करते थे। इसके लिए उन्हें डाँट भी खानी पड़ी लेकिन फिर भी वह डटे रहे।

    कंप्यूटर में ही बनाया कॅरिअर

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    बचपन से कंप्यूटर में ही दिलचस्पी होने के कारण वह दिन भर कंप्यूटर में ही लगे रहते थे. उनकी दीवानगी इस कदर थी की वे कंप्यूटर चलाने के अलावा कुछ और काम करना पसंद ही नहीं करते थे,इसीलिए त्रिशनित ने कंप्यूटर
    में ही अपना कॅरिअर बनाने का निश्चय किया और फिर दिन-रात नई-नई जानकारियां इकठ्ठा करने शुरू कर दि।

    हैकिंग में बनाई पकड़

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    शुरुआत में त्रिशनित को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा था लेकिन उन्होंने हैकिंग में अपनी पकड़ को मजबूत बनाते हुए साबित किया कि कैसे विभिन्न कंपनियों का डाटा चुराया जा रहा है और वर्तमान में हैकिंग के क्या तरीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

    महज़ 21 साल में बने CEO

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    शुरुआत में लोग उनकी बातें सुन कर मुस्कुरा देते थे ,उनकी बातो को मीडिया भी गंभीरता से नहीं लेता था। लेकिन धीरे-धीरे उनके काम को मान्यता मिलने लगी,कंपनियां उनके काम को सराहने लगीं। त्रिशनित ने महज़ 21 साल की उम्र में एक साइबर सिक्यूरिटी फर्म की आधारशिला रखी और आज वे रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कंपनियों को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं।

    दुबई-यूके में है वर्चुअल ऑफिस

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    आज इनका कारोबार सिर्फ भारत तक ही सिमित नहीं है बल्कि दुबई और यूके में भी इनकी कंपनी का वर्चुअल ऑफिस है जहा करीब 40% क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं आपको बताते चले की इनकी कंपनी की दुनियाभर में 50 फॉर्च्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं।

    बिज़नेस को ले जाना चाहते है US

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    त्रिशनित बताते है की अब वे कंपनी के बिजनेस को यूएस ले जान चाहते है। इतना ही नहीं वे कंपनी का टर्नओवर बढ़ाकर इसे दो हजार करोड़ रुपए तक ले जाना चाहते हैं।

    बनना चाहते है ग्रेजुएट

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    त्रिशनित का कहना है कि फेल होने के बाद उन्हें ये समझ में आया कि ‘पैशन’ के आगे पढ़ाई मायने नहीं रखती। लेकिन फिर भी वह भविष्य में वक्त मिलने पर मैनेजमेंट के साथ ग्रैजुएशन करना चाहते है । त्रिशनित को ‘पंजाबी आइकन अवाॅर्ड’ दिया जा चुका है. पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें गणतंत्र दिवस पर ‘स्टेट अवाॅर्ड’ दिया. त्रिशनित की सफलता की यह कहानी सच में बेहद प्रेरणादायक है। कृपया इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करे।